हरियाणा के सिरसा जिले में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। उपायुक्त (DC) शांतनु शर्मा ने नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में दो पंचायतों के सरपंचों पर कड़ा एक्शन लिया है। डबवाली खंड के गांव चट्ठा की सरपंच वीरपाल कौर को पद से बर्खास्त कर दिया गया है, वहीं नाथूसरी चौपटा खंड के गांव रंधावा के सरपंच सुभाष सिंह को सस्पेंड करने के आदेश जारी किए गए हैं।
चट्ठा गांव: 10वीं का शैक्षणिक प्रमाण पत्र निकला फर्जी
डबवाली क्षेत्र के गांव चट्ठा की सरपंच वीरपाल कौर की शैक्षणिक योग्यता को लेकर जांच चल रही थी। जांच में पाया गया कि चुनाव के दौरान प्रस्तुत किया गया 10वीं कक्षा का प्रमाण पत्र सही नहीं था। फर्जी दस्तावेज प्रमाणित होने के बाद उपायुक्त ने उन्हें तुरंत प्रभाव से सरपंच पद से हटा दिया। साथ ही पंचायत का सारा रिकॉर्ड, चल-अचल संपत्ति और धनराशि बहुमत वाले पंच को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
रंधावा गांव: आवास योजना के ₹1.60 लाख सरपंच के खाते में ट्रांसफर
गांव रंधावा में डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवास नवीनीकरण योजना में गंभीर वित्तीय गड़बड़ी उजागर हुई है। इस पर डीसी ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम-1994 की धारा 51 के तहत सरपंच सुभाष सिंह को निलंबित किया है।
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क्या था आरोप: योजना के तहत गांव की दो महिला लाभार्थियों—सीमा कंवर और धर्मो देवी के नाम मकान मरम्मत के लिए 80-80 हजार रुपये (कुल ₹1.60 लाख) की अनुदान राशि जारी हुई थी।
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तुरंत ट्रांसफर: राशि बैंक खाते में आते ही अगले दिन यह पूरी रकम सरपंच सुभाष सिंह के निजी खाते में ट्रांसफर करवा ली गई।
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जांच में खुली पोल: जिस मकान की मरम्मत का दावा किया जा रहा था, मौके पर केवल एक ही कमरा बना हुआ मिला। जिला कल्याण अधिकारी की जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद यह सख्त कदम उठाया गया।
सरपंच सुभाष सिंह ने नोटिस के जवाब में इन आरोपों को चुनावी रंजिश बताते हुए खुद को निर्दोष बताया था, लेकिन प्रशासनिक जांच और बैंक ट्रांजैक्शन के साक्ष्यों के आधार पर डीसी कार्यालय ने 25 अगस्त को निलंबन का आदेश जारी कर दिया।

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