हरियाणा में बदले मौसम ने किसानों पर दोहरी मार डाल दी है। एक तरफ जहां बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को तबाह कर दिया, वहीं अब मौसम विभाग की नई चेतावनी ने चिंता और बढ़ा दी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि जिन किसानों को फसल कटाई की उम्मीद थी, वे अब नुकसान का हिसाब लगाने को मजबूर हैं।
पश्चिमी विक्षोभ के असर से 31 मार्च को पूरे हरियाणा में मौसम ने अचानक करवट ली। हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, रेवाड़ी, भिवानी और महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी ओलावृष्टि हुई, जिसने खेतों में खड़ी और कटी हुई फसलों को बुरी तरह बिछा दिया। कई इलाकों में ओले इतने ज्यादा गिरे कि जमीन पर सफेद चादर जैसी स्थिति बन गई, जिससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई।
सोनीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह में भी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया। तेज हवाओं के चलते पेड़ों की टहनियां टूटकर सड़कों पर गिर गईं, जिससे आवागमन में भी दिक्कतें सामने आईं।
इस बेमौसम मार का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। गेहूं की फसल, जो कटाई के बिल्कुल करीब थी, ओलों की मार से झुक गई या टूट गई है। सरसों की फलियां झड़ गई हैं और चना व सब्जियों की फसल भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई किसानों के लिए यह नुकसान सीधे तौर पर पूरे सीजन की कमाई खत्म होने जैसा है।
मौसम विभाग के अनुसार 1 अप्रैल को कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है, हालांकि अधिकांश जिलों में मौसम साफ रहने का अनुमान जताया गया है। लेकिन राहत ज्यादा दिन की नहीं है, क्योंकि 3 और 4 अप्रैल को फिर से मौसम बदलने की संभावना है। गरज-चमक के साथ बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।
लगातार बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पहले ओलावृष्टि से फसल को भारी नुकसान हुआ और अब दोबारा बारिश की चेतावनी से बची-खुची फसल पर भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में किसानों को अब सिर्फ मौसम साफ होने की उम्मीद है, ताकि जो कुछ बचा है, उसे संभाला जा सके।





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