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ओम प्रकाश चौटाला कितनी बार मुख्यमंत्री बने थे? जानिए दिलचस्प आंकड़े

ओम प्रकाश चौटाला का जन्म 1 जनवरी 1935 को हरियाणा के सिरसा जिले के चौटाला गांव में हुआ था। वे राजनीतिक रूप से बेहद सक्रिय परिवार में पले-बढ़े; उनके पिता देवीलाल भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके थे। शुरुआती शिक्षा के बाद चौटाला ने राजनीति को अपनाया और धीरे-धीरे राज्य के प्रमुख नेताओं में अपनी जगह बनाई।

ओम प्रकाश चौटाला कितनी बार मुख्यमंत्री बने थे?
ओम प्रकाश चौटाला कितनी बार मुख्यमंत्री बने थे?

भारत के हरियाणा राज्य ने कई मंझे हुए राजनीतिक नेताओं को देखा है, लेकिन उनमें से कुछ नाम जनमानस के दिलों में आज भी गूँजते हैं। Om Prakash Chautala एक ऐसे ही नेता थे, जिन्होंने स्थानीय राजनीति, किसान आंदोलन और क्षेत्रीय सत्ता समीकरण में अपनी अलग पहचान बनाई। चौटाला का नाम हरियाणा के उन नेताओं में शामिल है जिन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री पद पर सबसे अधिक बार कार्य किया और लंबे समय तक भाजपा-कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों के बीच अपना राजनीतिक दबदबा बनाए रखा। उनका निधन दिसंबर 2024 में हुआ, लेकिन उनके नेतृत्व और विवादों से भरा राजनीतिक सफर आज भी चर्चा का विषय है।

शुरुआती जीवन और राजनीतिक परंपरा

ओम प्रकाश चौटाला का जन्म 1 जनवरी 1935 को हरियाणा के सिरसा जिले के चौटाला गांव में हुआ था। वे राजनीतिक रूप से बेहद सक्रिय परिवार में पले-बढ़े; उनके पिता देवीलाल भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके थे। शुरुआती शिक्षा के बाद चौटाला ने राजनीति को अपनाया और धीरे-धीरे राज्य के प्रमुख नेताओं में अपनी जगह बनाई।

मुख्यमंत्री पद पर पहली बार आगाज़ — 1989

ओम प्रकाश चौटाला ने पहली बार 2 दिसंबर 1989 को हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। यह मौका उन्हें तब मिला जब उनके पिता देवीलाल राष्ट्रव्यापी राजनीति में सक्रियता के साथ केंद्र की राजनीति में जयेश रहे थे। इस दौरान चौटाला ने राज्य का नेतृत्व संभाला। हालांकि, इस प्रथम कार्यकाल को लंबा समय नहीं मिल सका क्योंकि वे राज्य विधान सभा के सदस्य नहीं थे और विधान सभा सदस्य के रूप में छह माह की समय सीमा पूरी न कर पाने के कारण उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा।

छोटे-छोटे कार्यकाल — 1990 और 1991

उनकी राजनीतिक अग्नि परीक्षा यहीं खत्म नहीं हुई। 1990 और 1991 के बीच चौटाला को दो बार पुनः मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन दोनों ही कार्यकाल बेहद अल्पकालिक रहे। 12 जुलाई से 17 जुलाई 1990 तक का कार्यकाल मात्र पाँच दिनों का रहा, और 22 मार्च से 6 अप्रैल 1991 तक के कार्यकाल में भी केवल कुछ हफ्तों तक ही वे इस पद पर बने रहे। इसका कारण उस समय की राजनीतिक अस्थिरता और विधायकों के बीच हुए बदलाव रहे, जिनके चलते सरकार गिर गई।

सत्ता में वापसी और पूर्ण कार्यकाल (1999–2005)

चौटाला की राजनीतिक वापसी 1999 में हुई जब भारतीय राष्ट्रीय लोक दल (INLD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गठबंधन ने हरियाणा में सरकार बनाई। इस गठबंधन की सरकार में चौटाला ने फिर से मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली। 2000 के विधानसभा चुनाव में INLD-BJP को स्पष्ट बहुमत मिला और चौटाला 24 जुलाई 1999 से 5 मार्च 2005 तक लगातार कार्यरत रहे। यह उनका सबसे लंबा और सबसे स्थिर कार्यकाल था, जिसमें उन्होंने राज्य के कृषि, ग्रामीण विकास और शिक्षा जैसे मुद्दों पर कई घोषणाएँ कीं।

इस प्रकार ओम प्रकाश चौटाला समग्र रूप से पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे: 1989–1990, जुलाई 1990, मार्च-अप्रैल 1991, जुलाई 1999 से चुनाव के बाद 2000 तक (गठबंधन सरकार), और 2000–2005 तक पूरा कार्यकाल।

राजनीति में पहचान और विवाद

उनकी राजनीतिक पहचान हरियाणा के ग्रामीण एवं किसान समुदाय के बीच अत्यधिक लोकप्रिय थी। खासकर जाट समुदाय में उनकी पकड़ मजबूत थी, और चौटाला ने इस समुदाय के मुद्दों को सदैव जोर-शोर से उठाया। लेकिन उनका राजनीतिक सफर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। 2013 में चौटाला और उनके बेटे पर शिक्षक भर्ती घोटाले (JBT Scam) में दोषी ठहराया गया और उन्हें लम्बी जेल की सजा भी सुनाई गई। इसके कारण वे कई वर्षों तक जेल में बिताए और राजनीति से दूर रहे।

हालांकि जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी एक अप्रत्याशित कदम उठाया और अपने दसवीं और बारहवीं की परीक्षा पास की, जो एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक समाचार का विषय बना।

राजनीतिक विरासत और उत्तराधिकार

चौटाला का राजनीतिक परिवार आज भी हरियाणा की राजनीति में सक्रिय है। उनके पुत्र अजय सिंह चौटाला और अभय सिंह चौटाला ने भी राजनीतिक राहों में कदम रखा। विशेष रूप से उनके पोते दुष्यंत चौटाला ने राष्ट्रीय राजनीति में एक मंझे हुए चेहरे के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है।

ओम प्रकाश चौटाला भारतीय राजनीति के ऐसे नेता थे जिन्होंने न केवल पांच बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, बल्कि अपने नेतृत्व के माध्यम से हरियाणा की राजनीति को दशकों तक प्रभावित किया। उनके राजनीतिक सफर में सफलता, असफलता, विवाद और पुनरुत्थान — सभी रंग शामिल रहे। आज उनके निधन के बाद भी उनके राजनीतिक विचार और सामाजिक पहचान हरियाणा के राजनीतिक परिदृश्य में जीवित हैं।

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