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हरियाणा में उचाना चुनाव विवाद में हाईकोर्ट में बड़ा खुलासा, पोस्टल बैलेट रीवेरिफिकेशन पर उठे सवाल

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में हुई ताजा सुनवाई के दौरान ऐसी बातें सामने आईं, जिन्होंने पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर पोस्टल बैलेट के रीवेरिफिकेशन को लेकर जो खुलासा हुआ, उसने मामले को और गंभीर बना दिया है।

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हरियाणा के जींद जिले के उचाना हलके के चुनाव विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में हुई ताजा सुनवाई के दौरान ऐसी बातें सामने आईं, जिन्होंने पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर पोस्टल बैलेट के रीवेरिफिकेशन को लेकर जो खुलासा हुआ, उसने मामले को और गंभीर बना दिया है।

सुनवाई के दौरान तत्कालीन चुनाव अधिकारी और आईएएस अफसर विवेक आर्य ने गवाही देते हुए बताया कि उन्होंने पोस्टल बैलेट का रीवेरिफिकेशन कराया था। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उस समय मौके पर केवल अधिकारी और जीतने वाले पक्ष के लोग ही मौजूद थे, जबकि हारने वाले पक्ष का कोई भी प्रतिनिधि वहां नहीं था।

जब उनसे पूछा गया कि क्या हारने वाले पक्ष को बुलाया गया था, तो उन्होंने कहा कि माइक के जरिए अनाउंसमेंट कराया गया था, लेकिन इसका कोई लिखित रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध नहीं है। इस जवाब के बाद अदालत में प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल और गहरे हो गए।

अब कोर्ट ने मामले में अगला कदम उठाते हुए दूसरे पक्ष यानी भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री से गवाहों की सूची मांगी है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि 10 अप्रैल तक गवाहों की सूची पेश की जाए, जबकि 16 अप्रैल से गवाही की अगली प्रक्रिया शुरू होगी।

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी, जब कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह ने विधानसभा चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका आरोप था कि कई पोस्टल बैलेट वोटों को गलत तरीके से रद्द किया गया और उनकी दोबारा जांच नहीं की गई, जबकि नियमों के अनुसार ऐसा किया जाना जरूरी था।

याचिका में यह भी कहा गया कि करीब 150 पोस्टल बैलेट केवल स्कैनिंग में दिक्कत आने के कारण कैंसिल कर दिए गए, जबकि उनके लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। खास बात यह है कि जीत-हार का अंतर केवल 32 वोटों का था, ऐसे में इन वोटों की जांच बेहद अहम मानी जा रही है।

मामले में पहले भी कई कानूनी मोड़ आ चुके हैं। हाईकोर्ट ने जहां रिकाउंटिंग पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी थी, वहीं बाद में देवेंद्र अत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली और अब हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है।

ताजा घटनाक्रम के बाद यह साफ है कि उचाना का यह चुनाव विवाद आने वाले दिनों में और ज्यादा गरमाने वाला है। अब सबकी नजर 16 अप्रैल से शुरू होने वाली गवाही पर टिकी है, जहां इस पूरे मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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