हरियाणा में चिराग योजना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है और अब मामला सीधे सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दो महीने तक सरकार सोई रही? जब दाखिलों का ड्रॉ निकलने का समय आया, तभी इस योजना पर अचानक यू-टर्न क्यों लिया गया? और अब क्या सरकार पूरी जिम्मेदारी अधिकारियों पर डालकर खुद पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही है?
चिराग योजना में आय सीमा को लेकर पहले 8 लाख और फिर 1.80 लाख करने के फैसले ने लाखों अभ्यर्थियों और परिवारों को असमंजस में डाल दिया। अब इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है, जबकि चार्जशीट की प्रक्रिया भी चल रही है।
करीब दो महीने पहले विभाग की ओर से जारी एक पत्र में निजी स्कूलों की रिजर्व सीटों पर दाखिले के लिए आय सीमा 8 लाख रुपये तय कर दी गई थी। इस फैसले से मध्यम वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिली थी। लेकिन बाद में जांच में सामने आया कि यह आदेश लापरवाही के चलते जारी हुआ। इसके बाद 30 मार्च को विभाग ने नया पत्र जारी कर साफ कर दिया कि आय सीमा 1.80 लाख रुपये ही लागू रहेगी।
प्रारंभिक जांच में तीन अधिकारियों—असिस्टेंट रामबीर, सुपरिडेंट राजेश और असिस्टेंट डायरेक्टर नवीन अग्रवाल—को लापरवाही का जिम्मेदार माना गया है। इनकी शाखाएं बदल दी गई हैं और अब इनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी है।
विभागीय फेरबदल के तहत असिस्टेंट डायरेक्टर नवीन अग्रवाल को प्राइवेट स्कूल ब्रांच से हटाकर कोऑर्डिनेशन और ग्रीवांस शाखा में भेजा गया है। उनकी जगह विरेंद्र गोदारा को जिम्मेदारी दी गई है, जिनकी रिटायरमेंट में केवल एक साल बाकी है। वहीं असिस्टेंट रामबीर को टीजीटी स्थापना शाखा और सुपरिडेंट राजेश को मिड-डे मील शाखा में ट्रांसफर किया गया है।
पूरे मामले की फाइल प्रक्रिया पर नजर डालें तो यह साफ होता है कि आदेश कई स्तरों से होकर गुजरा। फाइल सबसे पहले असिस्टेंट स्तर से शुरू हुई, फिर सुपरिडेंट और असिस्टेंट डायरेक्टर के पास पहुंची। इसके बाद एडिशनल डायरेक्टर और डायरेक्टर स्तर पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी दी गई। ऐसे में सवाल और गहरा हो जाता है कि जब इतने स्तरों पर फाइल गई, तो गलती आखिर कैसे नहीं पकड़ी गई?
योजना के तहत प्रदेश के 1108 निजी स्कूलों में करीब 47 हजार सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों पर कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। आवेदन प्रक्रिया 30 मार्च तक पूरी हो चुकी है और 1 से 5 अप्रैल के बीच ड्रॉ के जरिए स्कूल अलॉट किए जाने हैं।
यही वजह है कि इस समय लिया गया यू-टर्न हजारों परिवारों के लिए झटका बन गया है। जिन अभ्यर्थियों ने 8 लाख आय सीमा को आधार मानकर आवेदन किया था, वे अब अचानक योजना से बाहर हो गए हैं।
फिलहाल विभाग अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या यह सिर्फ अधिकारियों की गलती थी या फिर सिस्टम की बड़ी चूक? आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस मामले में असली जिम्मेदारी किस पर तय होती है।





Comments are closed.