हरियाणा में छात्रों और उनके परिवारों को बड़ा झटका लगा है। कुछ ही महीनों पहले जिन परिवारों को सरकार ने 8 लाख रुपये तक की आय सीमा बढ़ाकर राहत दी थी, अब उसी फैसले को वापस लेते हुए दायरा फिर से छोटा कर दिया गया है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर शिक्षा जैसी अहम योजना में बार-बार नियम बदलकर सरकार क्या संदेश देना चाहती है—राहत या फिर असमंजस? अब चिराग योजना के तहत केवल उन्हीं बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त पढ़ाई का लाभ मिलेगा, जिनके परिवार की सालाना आय 1 लाख 80 हजार रुपये से कम है।
इससे पहले जनवरी 2026 में शिक्षा विभाग ने आय सीमा को बढ़ाकर 8 लाख रुपये तक कर दिया था, जिससे मध्यम वर्ग के परिवारों को भी इस योजना का लाभ मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन अब सरकार ने अपना यह फैसला वापस लेते हुए फिर से पुराने मानक लागू कर दिए हैं, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस योजना के दायरे से बाहर हो गए हैं।
शिक्षा विभाग के इस फैसले के तहत नए शैक्षणिक सत्र के लिए 1108 मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कुल 47,255 सीटें तय की गई हैं। इन सीटों पर छठी से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों को दाखिला दिया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि दाखिले के लिए परिवार पहचान पत्र (PPP) अनिवार्य होगा और उसी में दर्ज सत्यापित आय के आधार पर पात्रता तय की जाएगी।
इसके साथ ही यह भी जरूरी कर दिया गया है कि छात्र ने पिछली कक्षा सरकारी स्कूल से पास की हो। जिस क्षेत्र में छात्र पढ़ रहा है, उसी क्षेत्र के निजी स्कूलों में उपलब्ध सीटों पर ही उसे प्रवेश मिलेगा। इसके लिए स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (SLC) देना भी अनिवार्य किया गया है।
दाखिला प्रक्रिया भी तय कर दी गई है, जिसके तहत आवेदन की अंतिम तिथि 30 मार्च थी। अब 1 से 5 अप्रैल के बीच ड्रॉ निकाला जाएगा और 15 अप्रैल तक सभी चयनित छात्रों का एडमिशन पूरा करना होगा। इसके बाद यदि सीटें खाली रहती हैं तो 16 से 30 अप्रैल के बीच वेटिंग लिस्ट के छात्रों को मौका दिया जाएगा।
इस बीच सरकार ने निजी स्कूलों को राहत देते हुए नियम 134ए के तहत सात जिलों के स्कूलों को करीब 32 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति राशि भी जारी की है। इस पर महीपाल ढांडा ने कहा कि इससे छात्रों के साथ-साथ निजी स्कूलों को भी समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
हालांकि, आय सीमा को दोबारा घटाने के फैसले पर सवाल भी उठने लगे हैं। जिन परिवारों को हाल ही में 8 लाख आय सीमा के तहत उम्मीद जगी थी, वे अब खुद को योजना से बाहर पा रहे हैं। ऐसे में यह निर्णय सरकार के लिए एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, क्योंकि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर नीति में बार-बार बदलाव सीधे तौर पर आम जनता को प्रभावित करता है।
फिलहाल, जिन परिवारों की आय 1.80 लाख रुपये से कम है, उनके लिए यह योजना अभी भी बड़ी राहत बनी हुई है, लेकिन बाकी वर्ग के लिए यह फैसला निराशा का कारण बन सकता है।





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